पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सीजफायर के ऐलान ने अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में बड़ा असर डाला है। कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक बाजार में हलचल मच गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में WTI Crude Oil की कीमत में करीब 17 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जो लुढ़ककर करीब 91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Brent Crude Oil भी गिरकर लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है।
इससे पहले पिछले सत्र में WTI और ब्रेंट दोनों ही 100 डॉलर से ऊपर के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। लेकिन जैसे ही सीजफायर का ऐलान हुआ, बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया और कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।
जानकारों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद से आई है। खासकर Strait of Hormuz के फिर से खुलने की संभावना ने सप्लाई को लेकर चिंता कम कर दी है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं हो सकती। युद्ध के कारण ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है, जिसे पूरी तरह बहाल होने में समय लगेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर के आसपास पहुंच सकती हैं।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे देशों के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं, क्योंकि इससे महंगाई, चालू खाता घाटा (CAD) और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, सीजफायर के बाद आई यह गिरावट फिलहाल राहत जरूर दे रही है, लेकिन ऑयल मार्केट में अनिश्चितता अभी भी बरकरार है।












